Corona special poem, कोरोना के लिए दोहा (कोरोना कविता)

Poem / Kavita
Corona special poem, कोरोना के लिए दोहा (कोरोना कविता)

रहिमन वैक्सीन ढूंढिए,बिन वैक्सीन सब सून।वैक्सीन बिना ही बीत गए,अप्रैल मई और जून।।जुलाई अगस्त भी बीतेगारहिमन न हो उदास।दूर दूर ही रहिये, अभी न आइये पास ।।कोरोना भी हारेगा,नही है अधिक अब देरतब तक न काहू से दोस्ती,न काहू से बैर ।।

रहीमदास

रहिमन घर से जब चलो, रखियो मास्क लगाए ।ना जाने किस वेश में मिले करोना आए ।।

कबीरदास

कबीरा काढा पीजिए,काली मिरिच मिलाय ।रात दूध हल्दी पियो,सुबह पीजिए चाय ।।

तुलसीदास

छोटा सेनिटाइजरतुलसी रखिए जेब।न काहूँ सो मागिहो,न काहूँ को देब।।

सूरदास

सूरदास घर मे रहो,ये है सबसे बेस्ट।जर, जुकाम, सर्दी लगे,तुरत करालो टेस्ट ।।

मलूकदास

बिस्तर पर लेटे रहोसुबह शाम दिन रात।एक तो रोग भयंकराऊपर से बरसात।।

यंहा पर कुछ दोहा के माध्यम से हमने आज कल की वर्तमान स्थिति का वर्णन किया है वर्तमान में पूरा विस्व कोरोना महामारी वसे जूझ रहा है ऐसे में न घर से निकल जा सकता है और न ही अपने कार्यो को सही ढंग से संचालित किया जा रहा है कृपया हमारी पोस्ट अच्छी लगे तो इस पोस्ट को जरूर शेयर करे ।

Ranu

Ranu

Ranu is a creative content writer and educator at AKGnews.com, specializing in educational resources, literature, spiritual guides, wishes, and parenting tips.